इंटरनेशनल मार्केट में क्रूड की लगातार बढ़ रही कीमतें मोदी सरकार के लिए बड़ी मुसीबत बन सकती हैं। देश में रिटेल महंगाई अपने 17 महीनों के टॉप पर है। वहीं, क्रूड महंगा होने से पेट्रोल-डीजल की कीमतों में भी इजाफा हो रहा है। डीजल की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर हैं। माना जा रहा है कि जब देश में रिटेल महंगाई दर ऊंची बनी हुई है, आम आदमी की जेब पर बोझ और बढ़ सकता है। वहीं, क्रूड महंगा होने से सरकार की बैलेंसशीट बिगड़ने का भी खतरा बन गया है। ऐसे में क्रूड की कीमतें कंट्रोल नहीं हुईं तो यह आम केंद्र व राज्य चुनावों से पहले सरकार के लिए बड़ी मुसीबत साबित हो सकता है।

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डिमांड और सप्लाई का बैलेंस बिगड़ा केडिया कमोडिटी के डायरेक्टर अजय केडिया का कहना है कि इंटरनेशनल मार्केट में जो हालात बने हैं, उससे क्रूड की कीमतों को सपोर्ट मिल रहा है। बता दें कि क्रूड सोमवार को 70 डॉलर के स्तर को पार कर गया जो दिसंबर 2014 के बाद पहली बार हुआ है। फिलहाल अगले 2 महीनें क्रूड में गिरावट नजर नहीं आ रही है। उन‍का कहना है कि ओपेक देशों के अलावा रूस द्वारा प्रोडक्शन घटाने से सप्लाई घटी है। वहीं, पिछले दिनों ठंड बढ़ने से यूएस और कनाडा में भी रिग्स काउंट घटे हैं। ऐसे में डिमांड और सप्लाई का बैलेंस बिगड़ गया है। 75 डॉलर तक जा सकती हैं क्रूड की कीमतें यूएस में इकोनॉमिक रिकवरी देखी जा रही है। चीन में भी डाटा बेहतर आए हैं।